प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनता कर्फ्यू की अपील का असर रविवार सुबह पूरी तरह दिखाई दिया। मुंबई शांत और सड़कें सुनसान थीं। लेकिन, दोपहर होते-होते खामोशी में खलल पड़ गया। मुंबई के पॉश इलाकों में शाम तक प्रधानमंत्री की अपील का पालन अनुशासन से किया गया। वहां सुबह से लेकर शाम तक शांति रही, लेकिन गोरेगांव, ओशिवारा, मलाड, मालवाणी के कई इलाकों में लोगों की भीड़ जमा रही। दैनिक भास्कर ने जनता कर्फ्यू के दौरान यह जानने की कोशिश की कि मुंबई में इसका कितना असर है?
ओशिवारा: मोटरसाइकिल पर स्टंट दिखाया
दैनिक भास्कर की टीम जब ओशिवारा पुलिस स्टेशन पर पहुंची तो यहां पास ही पेट्रोल पंप पर लड़कों की टोली पेट्रोल भरवा रही थी। पूछने पर लड़कों ने कहा कि वे लोग माहिम जा रहे हैं, दरगाह पर। जब उनसे सवाल किया कि दरगाह तो आज बंद है? इन लड़कों ने कहा कि बाबा हमारा सलाम बाहर से ही ले लेते हैं। ये लड़के मोटरसाइकिल पर स्टंट दिखाते हुए यह कहकर निकल गए कि मौत अल्लाह के हाथ में है, कोरोना के हाथ में नहीं। इसी पेट्रोल पंप पर दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ एक युवा ने कहा कि इसलिए चले आए हैं, क्योंकि आज यहां भीड़ नहीं है।
मलाड: सड़क पर फुटबॉल और क्रिकेट
जब हमारी टीम मलाड से चंचोलिबंदर की ओर जाने वाली सड़क पर पहुंची तो लोग लिंक रोड पर फुटबॉल खेल रहे हैं। कुछ आगे जाने पर देखा कि कुछ लड़के क्रिकेट खेल रहे हैं। कहीं सड़क पर कैटवॉक की जा रही है। मोटरसाइकिल पर ट्रिपलिंग करके स्टंट दिखाते भी कई लड़के नजर आए। मालवाणी जैसे इलाकों में घरों से बाहर खूब लोग हुए। पूछने पर कहा कि खाना खाने के बाद बाहर निकलने को मन करता है। घर के अंदर नहीं बैठा जाता।
गोरेगांव: दोपहर के बाद बाहर आ गए लोग
गोरेगांव भगतसिंह नगर भी खूब भीड़भाड़ वाला इलाका है। वहां भीड़ का रेला है। भीड़ में से एक युवा का कहना है कि हम लोग स़क पर यह देखने के लिए निकले हैं कि सब बंदोबस्त ठीक है कि नहीं। प्रधानमंत्री की बात सब लोग मान रहे हैं या नहीं। मज़ाक करते हुए यह लोग कहते हैं कि बंदोपस्त देखना ज़रूरी है। कोई कह रहा है कि जायजा लेने निकले हैं। किसी ने कहा कि सड़क पर देखने के लिए निकले हैं कि कौन कौन निकला है।
गुलशननगर: यहां लग ही नहीं रहा कि जनता कर्प्यू है। लोगों से पूछा तो कहने लगे कि जीना-मरना ऊपर वाले के हाथ है। सवाल यह है कि इस लापरवाही से हम कोरोना के खिलाफ जंग कैसे जीतेंगे। जिस सख्ती और अनुशासन की जरूरत है, वह इस सोच के चलते कैसे लागू हो पाएगी। घर रहने के लिए छुट्टी मिली है, लेकिन लोग इसका इस्तेमाल आउटिंग में कर रहे हैं।
इन इलाकों ने पेश की नजीर
लोखंडवाला, जुहू, अंधेरी, कांदिवली जैसे इलाकों में सन्नाटा पसरा था। बात करने के लिए भी कोई सड़कों पर नहीं था। यहां तक कि साकीनाका और कुर्ला में भी सन्नाटा देखा गया। लेकिन, दूसरी तरफ ऐसे भी इलाके हैं, जहां लोग सड़कों पर हैं। इतने लोग कोरोना को महामारी बनाने के लिए काफी हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि जो लोग सड़कों पर हैं और इस खतरे के प्रति लापरवाह और बेखौफ हैं।